WHAT IS SEMICONDUCTOR IN HINDI : प्रकृति में बहुत से पदार्थ पाए जाते हैं। जिनमे से कुछ अपने अंदर से विधुत धरा को बहाने देते हैं। और कुछ नहीं। इसी के आधार पर पदार्थों को तीन भागों में बाटा गया हैं। प्रकृति में अब तक लगभग 105 पदार्थों का पता चला हैं। जिसमे :- सोना, चांदी,तांबा,लोहा,सिलिकोन,ज़रमेनियम इत्यादि मुख्य पदार्थ हैं।
(Gold, Silver, copper, Iron, Silicon, germanium,)
बाकि अन्य पदार्थों को मुख्य पदार्थों को एक निश्चित अनुपात में मिलाकर बनाया जाता हैं। जैसे-निकिल,कांसा इत्यादि।(nikal, mixed metals)

3 Types of material in hindi

CONDUCTOR चालक पदार्थ —

वह पदार्थ जो अपने अंदर से विधुत धारा को बहने देते हैं। चालक पदार्थ कहलाते हैं।
जैसे :सोना, चांदी,तांबा इत्यादि।

INSULATOR कुचालक पदार्थ —

ऐसे पदार्थ जो अपने अंदर से विदुथ धारा को बिलकुल भी नहीं गुजरने देते हैं कुचालक पदार्थ कहलाते हैं।
जैसे:- माइका,पलास्टिक,लकड़ी इत्यादि।

SEMI-CONDUCTOR अर्ध-चालक पदार्थ

वह पदार्थ जो विधुत धारा को अपने अंदर से बहुत ही सिमित मात्रा में या न के बराबर बहने देते हैं अर्ध-चालक पदार्थ कहलाते हैं। जैसे :-सिलिकोन और जर्मेनियम

अर्ध-चालक पदार्थों का निर्माण SEMICONDUCTOR Material 

चालक पदार्थ में कुछ मात्रा कुचालक पदार्थ को मिला दिया जाता है ,तो अर्ध-चालक पदार्थ का निर्माण होता है। इन्ही अर्ध-चालक पदार्थ का उपयोग Diode,Transistor इत्यादि बनाने में किया जाता हैं।

ट्रांजिस्टर को बनाने में मुख्य रूप से सिलिकॉन तथा जर्मेनियम का इस्तेमाल होता हैं।

Read Also – डायोड क्या होता है – What is Diode ?

सेमीकंडक्टर पदार्थ दो तरह के होते हैं – Types of semiconductor in hindi

  1. P Type
  2. N Type

N Type सेमीकंडक्टर

P type -पॉजिटिव आवेश वाले तथा N type नेगेटिव आवेश वाले होते हैं। इन दोनों को मिलाकर Semi-conductor Component तैयार किये जाते हैं।

P Type सेमीकंडक्टर

Diode एक ऐसा ही Semi-conductor component हैं। P type और N type को मिलाने पर P-N Juction बनता हैं।

डायोड काम कैसे करता हैं।

WHAT IS SEMICONDUCTOR

डायोड दो तरह से काम करता हैं। फॉरवर्ड बायस और रिवर्स बायस
डायोड के दो सिरे होते हैं। एनोड और कैथोड।
डायोड के P type वाले सिरे को एनोड तथा N type वाले सिरे को कैथोड कहते हैं।

FORWARD BIASING –

जब एनोड को पॉजिटिव सप्लाई देते हैं तो करंट एनोड से कैथोड की तरफ बहता हैं। तथा जब कैथोड को नेगेटिव सप्लाई देते हैं, तो करंट कैथोड से एनोड की तरफ बहता हैं। यह प्रक्रिया डायोड की फॉरवर्ड biasing कहलाती हैं।

कहने का मतलब यह हैं ,की डायोड का एनोड सिर सिर्फ पॉजिटिव करंट को ही अंपने अंदर से बहने देता हैं। इसी प्रकार कैथोड़ सिर्फ नेगेटिव करंट को। इस तरह से दिए जाने वाले करंट को डायोड का फॉरवर्ड Biasing कहते हैं।

REVERSE BIASING –

जब कैथोड को पॉजिटिव करंट तथा एनोड को नेगेटिव करंट देते हैं। तो इस तरह डायोड रिवर्स बायस में काम करता हैं। रिवर्स बायस में डायोड अपने अंदर से करंट को पास नहीं होने देता हैं।

इसी गुण के कारण डायोड का इस्तेमाल विभिन्न सर्किट में किया जाता हैं।

  1. Filtration circuit
  2. Rectification circuit
  3. Protection circuit

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1 COMMENT

  1. कहां कहां पर उपलब्ध है semiconductor और इस का घोल किस प्रकार बना सकते हैं

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