किडनी रोग का रामबाण घरेलु उपचार

Home Remedies for Kidney Disease : हमारे शरीर में गुर्दों का बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। शरीर की गंदगी बाहर करने के अलावा गुर्दों का काम हमारे शरीर में बनने वाले अम्ल की मात्र को भी निर्धारित करना होता है, ताकि हमारा रक्तचाप नियंत्रित रहे। गुर्दों की एक खास बात यह होती है कि वे बिना किसी बड़ी वजह के दर्द नहीं देते। इसिलए अगर आपके गुर्दों में या उनके आसपास के हिस्सों में दर्द हो रहा हो तो इसे नजर अंदाज बिलकुल नहीं करना चाहिए। यहां तक कि दुनिया में प्रचलित किडनी की गंभीर बीमारियों में से ज्यादातर में दर्द का लक्षण नहीं होता।

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किडनी की बीमारी के लक्षण

क्रॉनिक किडनी डिजीज या गुर्दे की कई गंभीर बीमारियों में शुरुआती दौर में मरीज को दर्द की शिकायत नहीं होती। मगर कुछ बीमारियों में गुर्दे या किडनी के आसपास स्थित शरीर के हिस्सों, जैसे कमर में दर्द हो सकता है।

गुर्दे में पथरी होने पर भी गुर्दे में तभी दर्द होता है। जब पथरी के छोटे-छोटे टुकड़े खिसक कर मूत्र नली में आ जाते हैं।
पथरी होने की स्तिथि में गुर्दे के आसपास कमर में पीछे की तरफ दर्द होता है।
अगर दर्द काफी तेज है तो मरीज को इसके साथ-साथ मितली या उल्टी हो सकती है।

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पेशाब नली में गंभीर संक्रमण होने पर भी गुर्दे में दर्द की शिकायत हो सकती है। यह समस्या होने पर मरीज को कमर में गुर्दे के आसपास की जगह पर और पेट में दर्द हो सकता है। इसके अलावा यह परेशानी अपने साथ तेज बुखार लाती है। पेशाब नली में संक्रमण के शिकार मरीज को पेशाब करने में जलन भी होती है।

(यूटीओ) यानी पेशाब की नली में रुकावट में गुर्दे की पथरी खिसक कर जब पेशाब नली में आ जाती है तो मूत्र मार्ग अवरुद्ध हो जाता है। इसके अलावा इसमें रुकावट आने की एक और वजह पेशाब नली का सिकुड़ना या नली में टय़ूमर हो सकता है। यूटीओ होने पर मरीज को हल्का या मध्यम तीव्रता का दर्द हो सकता है। पेशाब नली में अचानक रुकाव होने पर यह दर्द असह्य हो जाता है। यूटीओ में जो दर्द होता है, वह लगभग वैसा ही होता है, जैसा गुर्दे में पथरी होने पर होता है।

दोस्तों आज जो नुस्खा हम बताने जा रहे है उससे किडनी से सम्बंधित सभी परेशानियों में आपको लाभ मिलेगा।

किडनी रोग के उपचार

दूब यानी (हरी घास)
दूब यानी (हरी घास)

 

दूब यानी (हरी घास) की हरी पत्तियां 50 ग्राम और कलमी शोरा 10 ग्राम,

इसको बनाने के लिए एक मिटटी के गहरे बर्तन में एक लीटर पानी डालकर उसमे दुब का जूस और कमली शोरा को डालकर तेज़ आंच पर उबाले। उबलते समय बर्तन का मुँह ढक दे।

जब पानी आधा रह जाए तब इसको उतर ले और थोड़ा ठंडा होने दे। ठंडा होने पर इसको अच्छी तरह से मलकर किसी साफ़ कपडे से छान ले।
इसे बाद एक बार फिर आपको इसे किसी कलईदार बर्तन में दाल कर तब तक उबले जब तक सारा पानी जल न जाए। जब सारा पानी जल जायेगा तब बर्तन के पेंदी में जमे पदार्थ को खुरच कर निकाल ले और उसे महीन पीस ले। और शीशी में भर कर रख ले।

बस आपका नुस्खा तैयार है।

इसको 2 रत्ती (एक ग्राम के दसवे हिस्से को एक रत्ती कहते है यानी। 0.12 मिलीग्राम )की मात्रा में 60 ग्राम सौंफ के अर्क के साद सेवन करे. सौंफ का अर्क आपको किसी भी आयुर्वेदिक दवाइयों की दुकान पर आसानी से मिल जाएँगी।

यह किडनी के लिए संजीवनी की तरह से काम करती है। आपको चार पांच दिन तक के सेवन से ही इसका असर दिखाई देने लगेगा।

एक घास है जो जमीन पर पसरती है। शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जो दूब को नहीं जानता होगा। हाँ यह अलग बात है कि हर क्षेत्रों में तथा भाषाओँ में यह अलग अलग नामों से जाना जाता है।

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हिन्दू संस्कारों एवं कर्मकाण्डों में इसका उपयोग होने के कारण इस घास का हिंदु धर्म में बहुत महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। दूब घास संपूर्ण भारत में पाई जाती है। दूब घास पशुओं के लिए ही नहीं बल्कि मनुष्यों के लिए भी पूर्ण पौष्टिक आहार है। अनेक औषधीय गुणों की मौजूदगी के कारण आयुर्वेद में इसे ‘महाऔषधि’ में कहा गया है। दूब के पौधे की जड़ें, तना, पत्तियां सभी का चिकित्सा के क्षेत्र में विशिष्ट महत्व है। आयुर्वेद के अनुसार दूब का स्वाद कसैला-मीठा होता है। विभिन्न प्रकार के पित्‍त एवं कब्‍ज विकारों को दूर करने के लिए दूब का प्रयोग किया जाता है। दूब घास को पेट के रोगों, यौन रोगों, लीवर रोगों के लिए चमत्‍कारी माना जाता है। दूब में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं

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