आयुर्वेदिक औषधियां चित्रकमूल के फायदे

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ayurvedic jadi butiya hindi चित्रक यानी चीता की खेती पूरे भारत वर्ष में की जाती है। रंग भेद के हिसाब  से चित्रक की दो जातियां लाल चित्रक और सफेद चित्रक होती है। लाल चित्रक के फूल लाल रंग के तथा सफेद चित्रक के फूल सफेद रंग के होते हैं। सफ़ेद  चित्रक विशेषकर पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, दक्षिण भारत तथा श्रीलंका में होता है। रक्त(लाल) चित्रक खासिया पहाड़ सिक्किम, बिहार में अधिक मात्रा बहुतायत में मिलता है। इसका जड़, रस तथा पत्तों का प्रयोग किया जाता है। चीता डेढ़ से साढे़ तीन हाथ तक ऊंचाई वाला गुल्म जातीय जड़ी-बूटी है। इसके अलग-अलग  शास्त्राकार के मत से दो और किसी-किसी शास्त्राकार के अनुसार तीन  प्रकार होते हैं। ayurvedic jadi butiya hindi

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काला चीता : काला चीता को खाने से बाल काले हो जाते हैं। गाय के सूंघे हुए काले चीते को दूध में डालने से दूध काला हो जाता है।

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विभिन्न भाषाओं में नाम : Chitrak ayurvedic jadi butiya hindi

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हिन्दी –    चित्रक, चीता
संस्कृत –  चित्रक, दहन, अग्नि, ब्याल, कालमूल।
गुजराती – चित्रो, चित्रा
मराठी –    चित्रमूल
बंगाली –    चिता
पंजाबी –    चित्रा
तेलगू –      चित्रमूलम
अरबी –     शैतरज
फारसी –   बेख बरन्दा।

रंग : चीता के पत्ते हरे, फूल सफेद, लाल और इसकी जड़ें सफेद होती हैं।

स्वाद : इसका स्वाद कड़वा होता है।

स्वरूप : चीता एक प्रकार की घास होती है जोकि ऊसर और सुनसान जगह पर पायी जाती है। इसकी अनेक जातियां होती हैं जैसे सफेद, लाल, काले और पीले फूल, इनमें से सफेद फूल वाला सभी स्थानों में मिलता है। दूसरे फूल वाले चीते देखने में कम आते हैं। औषधि के रूप में चीता की जड़ का प्रयोग किया जाता है।

बाहय स्वरूप : चित्रक का 3 से 6 फुट ऊंचा झाड़ीनुमा पौधा बहुवर्षायु और सदाबहार होता है। चित्रक का काण्ड बहुत छोटा, भूमि के ऊपर से ही कई कोमल पतली-पतली चिकने हरे रंग की शाखाएं निकलती हैं। चित्रक के पत्ते 3 इंच लम्बे, 1 इंच तक चौड़े, नोकदार तथा हरे रंग के होते हैं। चित्रक के फूल 4-12 इंच लम्बे, शाखायुक्त, फूल पर लम्बी नलिका वाले सफेद वर्ण निर्गन्ध गुच्छों में लगे रहते हैं। चित्रक के फल लंबे गोल तथा एकबीजीय होते हैं। इसकी छाल पर छोटे उभार होते हैं। चित्रक की जड़ तोड़ने पर टूट जाती है। चित्रक का स्वाद कडुवा, तीखा और चित्रक की दुर्गन्ध बदबूदार होती है। इसके के फूल सितम्बर और नवम्बर में लगते हैं तथा चिपचिपे फल रोमों से भरे रहते हैं।

रासायनिक संघटन : चित्रक की जड़ में प्लम्बेजिन नामक एक तत्व पाया जाता इसके अतिरिक्त इसमें द्राक्षशर्करा, फलशर्करा, प्रोटिएज और इन्वर्टेज नामक एंजाइम्स होते हैं। ayurvedic jadi butiya hindi

स्वभाव : चीता गर्म प्रकृत्ति की होती है।

हानिकारक : इसका अधिक मात्रा में सेवन जिगर के लिए हानिकारक हो सकता है। चीता अधिक मात्रा में प्रयोग किए जाने पर जहर के समान कार्य करती है। अत: इसे सोच समझकर लेना चाहिए। साधारण लेप से भी शरीर पर छाले पड़ जाते हैं।

दोषों को दूर करने वाला : बबूल का गोंद और मस्तगी चीता के दोषों को दूर करता है।

तुलना : कचूर, मंजीठ से चीता की तुलना की जा सकती है।

मात्रा : इसे 3 ग्राम की मात्रा में सेवन कर सकते हैं।

चित्रक के गुण : चीता पाचक होता है, जल्द घाव पैदा कर देता है। खाल को जला देता है। पेट के मल को दस्तों के द्वारा साफ निकाल देता है। आवाज को साफ कर देता है।

चित्रक औषधी : चित्रकमूल के फायदे  Chitrakmul ke Fayde

Chitrakmool, ayurvedic jadi butiya hindi, chitramul
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  • चीता गठिया (जोड़ों का दर्द) को नष्ट करता है। इसका लेप करने से सफेद कोढ़ नष्ट हो जाता है।
  • यह संग्रहणी, कोढ़, सूजन, बवासीर, कृमि (आंतों के कीडे़), खांसी और गैस को समाप्त करता है।
  • पेट के रोगों में चीता एक उपयोगी औषधि है। चीता अपने तीखेपन से कफ को, कड़वेपन से पित्त को और गर्मी से वात को नष्ट करता है। इस प्रकार से चीता त्रिदोषनाशक होता है।
  • चित्रक त्रिदोषों (वात, पित्त, कफ) को नष्ट करता है। गर्म होने से यह वात को शांत करती है। यह आमपाचन है तथा आंतों से मल को निकालकर बाद में स्तम्भन करता है।
  • तिक्त होने से यह स्तनों की शुद्धि, रक्तशोधक (खून को साफ करना), सूजन को दूर करने वाला, कटु और पौष्टिक होता है।
  • यह कफघ्न (बलगम को हटाने वाला), ज्वरघ्न (बुखार को मिटाना) और विषम ज्वर नाशक है।
  • रूक्ष होने से यह लेखन है। यह औषधि बवासीरनाशक होती है। चित्रक, करेला आदि यह आरोग्यवधादि-गण की वनस्पतियां, श्लेष्मा, विष, कुष्ठ, प्रमेह, वमन (उल्टी), खुजली तथा घावों को नष्ट करने वाला होता है।
  • चित्रक, कुटज, पलाश और त्रिफला, प्रमेह, बवासीर, पेचिश एवं शर्करा आदि रोगों को दूर करता है।
  • चित्रक हरीतकी, आंवला, बहेड़ा, पाढा यह मुष्ककादिगण कफनाशक, योनिदोषक, दूध शोधन करने वाला और पाचक होता है।

विशेष सावधानी : चित्रक का अधिक मात्रा में उपयोग नहीं करना चाहिए। निर्धारित मात्रा में ही इसका सेवन उपयोगी होता है व अधिक मात्रा में सेवन करने से ये जहर का कार्य करती है।

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