अहमक नाम के राजा की कहानी The story of the king named insensate

ख्वाहिशों का कभी कोई अंत नहीं।

मिडास नामक लालची और अहमक राजा के पास काफी सोना था। जितना सोना वह जमा करता। उतना ही ज्यादा सोना पाने की उसकी भूख बढ़ती जाती थी। एक दिन उसके पास एक फ़क़ीर आया और बोला, कि वह उसकी कोई एक मनमोहक पूरी कर सुनकर बहुत खुश हुआ और बोला, मैं जिस चीज को छू लूं वह सोना बन जाएं।

फ़क़ीर ने तुरन्त ही होने का आशीर्वाद दिया। अगले दिन जब वह सोकर उठा। उसने अपने पलंग को छुआ। तो पलंग सोने का हो गया।

मिडास कि प्यारी बिटिया बाहर बगीचे में खेल रही थी। मिडास ने सोचा कि वह बाहर जाकर उसे अपनी करामाती शक्ति दिखाकर खुश कर देगा। वह हर चीज को छूने लगा। उसने एक किताब को छुआ। वह पालक झपकते ही सोने कि किताब बन गई।

लेकिन अब उसे पढ़ पाना सम्भव नहीं था। वह नाश्ता करने बैठा। लेकिन जैसे ही उसने फलों को हाथ लगाया। वे भी सोने फल बन गए। पीने का पानी भी सोने में बदल गया। मिडास को बहुत तेज भूख लग रही थी। लेकिन सोना खाकर तो कोई पेट नहीं भर सकता। मिडास समझ नहीं पा रहा था कि क्या करें। इतने में उसकी बिटिया भागते हुए आई, और मिडास को गले से लगा लिया। मिडास को छोटे ही वह भो सोने के बुत में तब्दील हो गई।

अब मिडास रोने लगा उसे अपनी बेवकूफी पर दुःख हुआ। तभी कहीं से वह फ़क़ीर आ पहुंचा। उसने पूछा इतना सारा सोना पाकर खुश हो ?

मिडास ने कहा नहीं मई सबसे दुखी मनुष्य हूँ। मझे माफ़ कर दीजिये। मेरा सब कुछ ले लीजिए। लेकिन मेरी बिटिया को पहले जैसा बना दीजिये।

अंतर्ज्ञान:

अत्याधिक लोभ करने से कोई फायदा नहीं होता- बल्कि संकट ही पैदा होता हैं।

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