pati patni ki kahani in hindi एक गाँव में पति और पत्नी रहा करते थे. दोनों में बहुत प्यार था. गाँव से थोड़ी दूर पर एक महात्मा जी प्रवचन किया करते थे.  उनके यहाँ बहुत भीड़ होती थी. एक दिन वह आदमी भी वहां पहुंचा. महात्मा जी समझा रहे थे की इस दुनिया में कोई भी किसी का सच्चा साथी नहीं है.

pati patni ki kahani in hindi

सब रिश्ते नाते मतलब और स्वार्थ के है. वह आदमी बीच में बोला की महाराज ! मेरी स्त्री बड़ी पतिभक्त है. महात्मा जी बोले की क्या मतलब ? वह बोला की वह मेरे बिना खाना नहीं खाती और मेरी आज्ञा का पूरा पालन करती है. इसी तरह उसने दो तीन दिन किया महात्मा जी की बात काट दे और अपनी स्त्री की तारीफ करे. महात्मा जी बोले की अरे बच्चा ! कौन किसकी स्त्री ,कौन किसका पति, कौन किसका बच्चा ? यह सब कहने की बाते है. pati patni ki kahani in hindi

यह तो झूठा नाता है. अगर तू इसकी परीक्षा लेना चाहता है तो मेरे पास आया कर. वह आदमी महात्मा जी के पास आने लगा तो महात्मा जी ने उसे सांस रोकना सीखा दिया. अब वह कई घंटों तक सांस रोक सकता था .pati patni ki kahani in hindi
एक दिन बोले की बच्चा ! आज जाकर परीक्षा कर ले की कौन तेरा है कौन नहीं ? महात्मा जी ने सब उसको समझा दिया. वह घर गया और दोनों हाथ-पैर फैलाकर लेट गया और सांस रोक ली. स्त्री आई , उसको देखा तो चिल्लाने लगी.

अड़ोसी-पडोसी आ गये. लोगों ने देखा तो कहा की यह तो मर गया. अब रोना पीटना होने लगा. लेकिन वह आदमी तो सब सुन रहा था. लोग बांस ,कपडा ,रस्सी वगैरह ले आये. जब उसको बाँधने लगे तो उसके हाथ पैरों को मोड़ कर सीधा करना चाहे तो वो मुड़े ही नहीं एकदम कड़े हो गये.pati patni ki kahani in hindi

तो लोगों ने कहाँ की नहीं मुड़ते है तो ऐसे ही बाँध दो जब बांधकर “राम नाम सत्य है ” कहते हुए अर्थी उठाई और आगे बड़े तो निकलने का दरवाजा छोटा था. अब बड़ी मुसीबत. हाथ पैर फैले हुए , दरवाजा छोटा ,निकले तो कैसे निकले ?

किसी ने कहा की यह दीवाल तोड़ कर दरवाजा निकाल दो तो तब चला जायेगा. जब तोड़ने चले तो उसकी स्त्री दोड़ कर सामने खड़ी हो गयी. बोली की दीवाल तोड़ दोगे तो मकान गिर जायेगा फिर कौन बनाएगा ? लोगों ने कहा की तो निकलेगा कैसे इसके हाथ पैर तो फैले हुए है ,मुड़ते ही नहीं. स्त्री बोली अक्ल मैं बताये देती हूँ , दीवाल मत तोड़िए.pati patni ki kahani in hindi

वह अन्दर गयी और एक गड़ासा ले आई . कहने लगी इधर से हाथ और इधर से पैर काट दीजिए . तब यह छोटा हो जायेगा फिर ले जाइये . वह आदमी तो सुन ही रहा था उसने सोचा की एक मिनिट की भी देर हुई की मेरे हाथ पैर कटे. उसने जोर का झटका मारा की रस्सी टूट गयी और सीधा महात्मा जी के पास भागा. जाकर उनके चरणों में गिरा और बोला महाराज . अगर एक मिनिट की भी देर हो जाती तो मेरी स्त्री मेरे हाथ -पैर कटवा देती. फिर मैं किसी भी काम का नहीं रह जाता .pati patni ki kahani in hindi

 

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