navagrah ke Upay : संसार का प्रत्येक मानव अपने जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं एवं परेशानियों सुख संपदा के आने वाले दिन आदि को जानने के लिए पल-पल परेशान और लालायित रहता है। इसका निवारण Jyotish shaastra (ज्योतिष शास्त्र) कराता है। दुनिया के ज्योतिष शास्त्रों में मुख्य रूप से उन सात ग्रहों को ही मान्यता दी गई है। जो हमारे जीवन को निरंतर Operated (संचालित) करते रहते हैं।

फलित ज्योतिष के अनुसार नवग्रहों का मनुष्य पर प्रभाव 

Surya Grah : सूर्य ग्रह के कुपित होने से जातक को सिर व मष्तिष्क, ह्रदय, नेत्र, कान रोग और अस्थि भंग जैसी समस्याएं होने का अंदेशा रहता है।

 

Chandra Grah : चंद्र ग्रह के प्रभाव से Mental disease (मानसिक रोग), नींद न आना, नींद का बार-बार टूटना, जल से भय और उन्माद होने का अंदेशा रहता है।
 Mangal Grah : मंगल ग्रह के कुपित होने से पित्त विकार, skin disease (त्वचा रोग), टायफाइड और Appendix (अपेंडिक्स) हो सकते हैं।

 

Budh Grah : बुध ग्रह के कारण वात, पित्त और कफ से सम्बंधित रोग, नाक और गले के रोग तथा Lack of intelligence( बुद्धि की कमी) की संभावनाएं रहती हैं।

 

Guru Grah : गुरु ग्रह के कुपित होने से गठिया, Back and joint pain (कमर व जोड़ों में दर्द), शरीर में सूजन, कब्ज आदि समस्याएं होने लगती हैं।
Shukra Grah : यदि शुक्र ग्रह कुपित हो तो जातक को वात और कफ रोग होने के साथ-साथ शरीर के अंदरूनी हिस्सों में रोग होने की आशंका रहती हैं।

 

Shani Grah : शनि ग्रह के कुपित होने से वात एवं कफ रोग, Cancer (कैंसर), सांस के रोग जैसे रोग होने लगते हैं।
Rahu Grah : यदि जातक राहु ग्रह से प्रकोपित हो तो उसे संक्रामक रोग, ह्रदय रोग, विष जनित रोग और Pain in arms and legs (हाथ और पैरों में दर्द) जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

 

Ketu Grah : यदि केतु ग्रह कुपित हो तो जातक त्वचा रोग, Digestive disease (पाचन संबंधी रोग) का शिकार हो सकता है।

 

 

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