मैं क्यों बड़ी हो गयी Mai kyun badi ho gayi

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मैं क्यों बड़ी हो गयी Mai kyun badi ho gayi

एक दिन पूछा पापा से

मैं छोटी से एकाएक यों बड़ी हो गयी ?

आपके आंगन की कली- नाजों में पली

मां की ममता में पगी-

भैया के रेशमी रक्षासूत्र में बंधी-

दूसरों ने शरारतें कीं भी- तो उन्हें दी रिहाई

पर मुझे ही क्यों दी परिवार से बिदाई ?

तुम्हारी नजर में बड़ी हो गयी

क्या इसलिए बोझ हो गायी ?

आंसुओं को आँखों में छुपाएं- पापा बोले प्यार से सुन मेरी पयरी गुड़िया

तू आज भी है मेरी खुशियों की वही मुनिया

हर बेटी लक्ष्मी रूप में घर आती हैं

सीता रूप में राम संग व्याहती है

दुल्हन बन जब अपने घर जाती है

मां के रूप में यशोदा की ममता बरसाती है

संकट पड़े- तो विघविनाशिनी दुर्गा बन जाती है

बेटियां एक ही जीवन में कई रूप दिखाती है

इसलिए वे जल्दी बड़ी हो जाती है

सच- बहुत जल्दी बड़ी हो जाती है  (Pinki Kanaujiya)


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