ख़ुशी पाने की चाह Gladly want to get

अंतर के खजाने

एक गावं में एक किसान रहता था, जो की करीब था वह खेत से आजीविका कमाने की कोशिश करता था पर इतना नही काम पाता था की अच्छा घर, महँगी चीजे या सुंदर वस्त्र ले सकें। वह इतने फाटे पुराने कपडे पहनता था की आसपास के कुछ पड़ोसी उसका मजाक उड़ाते थे। फिर भी वह व्यक्ति, जो कुछ उसकी पास था उससे संतुष्ट था। वाह प्रभु का बड़ा भक्त था और अपना खाली समय प्राभु की भक्ति। ध्यान आओर प्राथना में लगता था।

उस व्यक्ति के कुछ दोसतों ने उसे सलाह दी कि वह प्राभु की प्रार्थना में समय बर्बाद करने की बजाय, अपने लिए कुछ करे। वह व्यक्ति अपने जीवन से प्रसन्न था पर क्योंकि वे उसे बार बार टोकते थे कि वह अपनी हालत बदलने की लिए कुछ करे, इसलिए उसके मन में एक शक का बीज उगने लगा। वह यह सोचने लगा अगर वह धनवान हो जाए तो हो सकता है की वह अधिक खुश रहने लगे।

आक रात किसान को स्वप्न दिखाई दिया। उसने एक दैवी पुरुष को देखा उसने कहा कि वह शहर जाए, जहाँ उसे एक बड़ा खजाना मिलेगा। जब किसान उठा तो उस पर उसके दोस्तों का प्रभाव था कि वह धन की खोज करे। अतः उसने स्वप्न को सच मान लिया। वह शहर की यात्रा पर चल दिया। वह पहले कभी शहर नही गया वह शहर के नियमों से अनजान था। एक पुलिस इन्सपेक्टर ने इधर-उधर घूमते हुए पकड़ लिया और उसे पुलिस-स्टेशन ले गया।

इन्सपेक्टर ने पूछा, ‘तुम रात-दिन इधर-उधर घूमकर क्या कर रहे हो ?” किसान ने बताया,” मैं एक खजाने की खोज में  हूँ। मुझे एक सपना आया था। जिसमे मुझे बताया गया था कि वह बड़ा खजाना मुझे यहाँ मिलेगा।”

पुलिस इन्सपेक्टर ने बोला, ” तुम पागल हो। मुझे खजाना मिलने के कई सपने आए हैं। वे केवल स्व्प्न है। स्वप्न में किसी पर ध्यान नही देता हूँ। वे बेकार के सपने है। उदाहरण के लिए- एक बार मुझे सपना आया कि मुझे शहर के बाहर एक गावं की एक झोपडी में जाना चाहिए। झोपडी के पास से एक नहर गुजरती है। गुजरती है पास में एक छोटा खेत भी है, पर वह घर किसी गरीब का था। स्वप्न में मुझे बताया गया था कि वहां मुझे एक खजाना मिलेगा- पर मैं कभी वहां नहीँ गया क्योंकि सपने सच नहीँ होते है।

जब पुलिस इन्सपेक्टर घर का विवरण दे रहा था तो किसान को एक झटका सा लगा। जिस घर के बारे में वह बता रहा था। वह बिल्कुल किसान के घर के जैसा ही लग रहा था।

पुलिस ने उसे वापिस उसके गावं भेज दिया। व्यक्ति इस सम्भावना से फूला नहीँ समा रहा था कि जिस खजाने को वह ढूँढ़ रहा था, वह स्वयं उसके घर के सामने के मैदान में हो सकता था।

किसान उस स्थान पर गया जिसका विवरण इन्सपेक्टर ने दिया था। उसने खोजना शुरू किया। और सच में, उसे एक बड़ा सन्दूक मिला, जिसमे भरे खाजने से वह धनवान बन गया। वह आस्श्चर्य चकित था कि इतने समय से स्वयं, उसके घर के पास खजाना छुपा हुआ था।

यह कहानी हमारी अपनी अवस्था को बताती है। हम सम्पूर्ण संसार में प्रेम और कुसी ढूंढते रहते है पर हम यह नहीं जानते की सच्ची ख़ुशी, सच्ची दौलत और सच्चा प्रेम हमारे अन्तर में हमारा इंतजार कर रहें है।

हम सोचते हैं कि ख़ुशी हमसे बाहर है। हम सोचते है कि यह धन दौलत, नाम-प्रसिध्दि, जायजाद और सम्बंधों से मिलती है। पर सच्ची खुसी अन्तर में है। प्रभु हमारे अन्तर में है, प्रभु का प्रेम अन्तर मे है, बाहरी संसार मे ऐसा कुछ भी नहीं है, जो उसका मुकाबला कर सके। सच्चे खजाने को बाहर खोजने के बजाय, हमे ध्यान अभ्यास में बैठना चाहिए और अन्तर में सच्चे धन को खोजना चाहिए। तब हम अपने जिंदगी प्रेम, आनन्द, शाश्वत शांति और खुसी से भरी पाएँगे।

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