तिल है सौंदर्य को निखारने में सहायक Sesame beauty whiten

लाभदायक और शुभता का एहसास तिल से

भारतीय परंपरा में सफ़ेद तिल की अपनी एक अलग ही महत्व है, सफ़ेद तिल स्वाथ्यवर्धक होने के साथ ही शुभ भी माने जाते है, और सौंदर्य में भी वृद्धि करते है विशेषज्ञों का मनना है, जिस समय तिल अपने प्राकृतिक अवस्था में होते है, चाहे वह काले तिल हों या सफ़ेद उस समय वे 99.99 % शुद्ध होते है इन तिलों को मशीन की सहायता से सुखाया जाता है, विशेषज्ञ मानते है कि पहले कि तुलना में आज उनके पास ज्यादा बेहतर यंत्र है, जिनकी सहायता से उनकी सॉर्टिंग क्लीनिंग और पालिशिंग की प्रकिया को कुशलतापूर्वक की जाती है, इसके बाद भी तिलों की शुद्धता बनी रहती है, तिलों के बहरी छिलकों को उतारने के लिए हीलिंग प्रक्रिया का भी प्रयोग किया जाता है।

यों तो इन तिलों का अपनी कोई सुगंध व् स्वाद नहीं होता- लेकिन फिर भी ये स्वाथ्यवर्धक और सौंदर्यवर्धक होते है।

सौंदर्य को निखारने में सहायक

खास मुहावरा:   यह ‘ इन तिलों में तेल नहीं ‘ तिल की खूबी को दर्शाता है,

तिलों तेल की अधिकता होने के कारण भी इनका प्रयोग सर्दियों में किया जाता है,

ताकि शरीर में नमी बनी रहे, तिल खनिज लवणों से भी भरपूर होते है,

इनमे आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्निशियम सभी तत्व पाए जाते है,

जो लाभकरी होने के साथ, खूबसूरती में भी वृद्धि करते है।

कैल्शियम : यह शरीर के लिए आवश्यक मिनरल है जिससे दांतों की सुंदरता बढ़ती है, व् दांत मजबूत बने रहते है, इसकी कमी से, हड्डियां कमजोर हो जाती है व् टूटने का भय रहता है।

फास्फोरस : यह मैटाबॉल्ज़िम को सही बनाएं रखने में सहायक होता है, क्योंकि इससे ही भोजन एनर्जी में बदलता है। तिल में फास्फोरस की मात्रा अधिक पाया जाता है, इसके प्रयोग से त्वचा में चमक आती है औए रंगत निखरती है।

मैग्नेशियम : यह शरीर के लिए एक आवश्यक मिनरल है, यह नई कोशिकाओं के निर्माण में सहायता करता है। उम्र बढ़ने से शरीर की कोलजान की मात्रा काम होने लगती है, जिससे चहरे पर फाइन लाइन्स नजर आने लगती है, इसके प्रयोग से आप लम्बे समय तक जवां और खूबसूरत बनी रहती है, यह मांसपेशियों को भी स्वथ्य रखता है।

आयरन : आयरन का प्रचुर मात्रा में सेवन करने से सौंदर्य में वृद्धि होती है क्योंकि इससे त्वचा में लालिमा बनी रहती है, जिससे चेहरे की सुंदरता बढ़ जाती है।
आयरन की कमी से अनीमिया हो जाता है, इस बीमारी से ग्रस्त इंसान थका थका निस्तेज हो जाता है, अनीमिया होने से चेहरा पीला पड़ जाता है, नाखून भी टूटने लगते है, इंसान में चुस्ती फुर्ती नहीं रहती।

त्योंहारों में है विशेष महत्व

सफ़ेद तिलों का भारतीय त्योंहारों में भी अपना विशेष महत्व है, इसे पारंपरिक रूप से एक मीठे व्यंजन की तरह इस्तेमाल किया जाता है जैसे मकर संक्रांति के दिन तिलों को बड़ा शुभ माना जाता है, पूजा के लिए विशेष रूप से तिल के लड्डू बनाएं जाते है, इसी तरह संकटचौथ व्रत प्०र भी तिलों की अपनी अलग मान्यता है, तिलों की तासीर गर्म होने के कारण सर्दी के मौसम में खासतौर पर तिलों के मिष्ठान्न बनाएं जाते है।

बेकरी प्रोडेक्ट और कन्फेक्शनरी में भी

तिलों का छिलका उतारने कले बाद, जब इन्हें भून जाता है तो, इनका स्वाद अखरोट की तरह लगता है, इसे प्रकार के व्यंजनों में स्वाद बढ़ने और ताशीर गर्म करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है, तिल का प्रयोग करने पर अक्सर दुकानदार उस व्यंजन या मिठाई को मंहगे दामों में बेचते है, सफ़ेद तिल बहुत लाभदायक होते है, सफ़ेद तिलों कक प्रयोग ज्यादातर बेकरी प्रोडेक्टज जैसे ब्रेड- ब्रेडस्टिक- कुकीज- कैंडी इत्यादि में किया जाता है, इसकके अतिरिक्त इनका प्रयोग पास्ता व् सब्जियों को गार्निश करने के लिए किया जाता है, इनका प्रयोग पत्तेदार सब्जियों में भी किया जाता है, तिलों का प्रयोग भारतीय के अलावा जापानी व् चीनी लोग भी करते है।

काले तिल भी शुभ

सफ़ेद तिलों के साथ कालें तिलों का भी अपना का अलग महत्व है, कालें तिलों को हिन्दू धर्म में बहुत ही पवित्र माना जाता है, इसे दान करना बहुत शुभ माना जाता है, उडद की दाल में काले तिलों को भूनकर डालने से उडद के दाल के जो अवगुण होते है वे भी समाप्त हो जाते है।

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